भारत के सबसे अमीर आदमी मुकेश अंबानी के बारे में तो सभी को पता है लेकिन अब सुनिए भारत की पांच सबसे अमीर महिलाओं के बारें में।
ये वो महिलाएं है जिन्होंने रईसी के मामले में कई दिग्गज उद्योगपतियों को पीछे छोड़ दिया है. इन्ही में से एक है ओपी जिंदल ग्रुप की चैयरपर्सन सावित्री जिंदल. इनकी कुल संपत्ति अनिल अंबानी की संपत्ति से भी ज्यादा है।
सावित्री जिंदल ने लगातार चौथे साल भारत की सबसे अमीर महिला के खिताब पर कब्जा जमाया है। इनकी कुल संपत्ति 14.4 अरब डॉलर है.
भारत के अमीरों में 21 पायदान और महिला रईसों की लिस्ट में दूसरे नंबर पर हैं इंदू जैन. वे बेनेट कोलमेन ग्रुप की चैयरपर्सन है. यह ग्रुप टाइम्स ऑफ इंडिया जैसा बड़ा अखबार चलाता है। इनकी कुल संपत्ति 3 अरब डॉलर है।
तीसरे नंबर पर है थर्मेक्स ग्रुप की चैयरपर्सन अनु आगा. भारतीय अमीरों की लिस्ट में अनु आगा 51वें पायदान पर हैं। अनु आगा सन 1985 से कंपनी से जुड़ी हैं। 1995 में पति की मौत के बाद उन्होंने कंपनी की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली।
बायकॉन की किरन मजूमदार शॉ भारत की चौथी सबसे अमीर महिला हैं। उनकी कुल संपत्ति 90 करोड़ डॉलर है जबकि भारतीय अमीरों में उनका नंबर 75वें स्थान पर हैं।
पांचवीं भारत की सबसे अमीर महिला का खिताब जाता है हिंदुस्तान टाइम्स की चैयरपर्सन शोभना भरतिया को। शोभना भरतिया की कुल संपत्ति 89.5 करोड़ ड़ॉलर है। भारतीय अमीरों की सूची में वो 76 वें पायदान पर हैं।
शुक्रवार, 1 अक्टूबर 2010
गुरुवार, 30 सितंबर 2010
एक रसभरी जिंदगी हमारी भी
एक मित्र का पत्र आया है. कहते हैं-- तकदीर हमारा साथ क्यों नहीं देती? अब मैं एक बार फिर याद दिलाऊं कि तकदीर तो हमने ही लिखी है ना! फिर किसी और को दोष क्यों देते हो? याद रखो--
- हमारे साथ वही हुआ, वही हो रहा है और वही होगा जिसके हम पात्र हैं.
- अगर आप वही करेंगे जो करते आये हैं तो आपको वही मिलेगा जो मिलता आया है.
- जिसने अपने जीवन में जितने ही अधिक लोगों से परस्पर लाभ का समीकरण पैदा कर लिया है, वह उतना ही सुखी है.
- अगर आप अधिक धनवान बनना चाहते हैं तो अधिक लोगों की सेवा करें.
- गरीब पैदा होना लाचारी हो सकती है, लेकिन गरीबी में मर जाना महापाप है.
- दुनिया में ऐसी कोई ऊंचाई नहीं जिसे आप छू नहीं सकते. बस अपने लक्ष्य के मुताबिक प्रयास करने की जरूरत है.
भारतीय महिला दुनिया के शिखर पर
भारत की दो महिलाओं ने दुनिया के कॉर्पोरेट जगत में भारत की शान बढ़ा दी है।
भारतीय मूल की पेप्सिको की प्रमुख इंदिरा नूयी को 'फॉर्च्यून' पत्रिका ने लगातार पांचवें साल दुनिया की सबसे ताकतवर महिला करार दिया है। इसी लिस्ट में क्राफ्ट फुड की इरेन रोसेनफील्ड को दूसरे स्थान पर रखा गया है।
सुश्री नूयी ने अपने कार्यकाल में पेप्सिको के लिए दो सबसे बड़ी बोटलिंग प्लांट्स का अधिग्रहण किया है. इस कारण कम्पनी का राजस्व 60 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। इसके साथ ही नूयी ने खर्च में प्रतिवर्ष 40 करोड़ डॉलर की कटौती के लक्ष्य को भी हासिल किया है।
उधर अमेरिका के बाहर दुनिया की 50 सबसे ताकतवर महिलाओं की लिस्ट मं आईसीआसीआई बैंक की प्रमुख चंदा कोचर को भी जगह मिली है।
इस लिस्ट में चंदा कोचर को 10वां स्थान मिला है। 49 वर्षीय चंदा कोचर ने करीब 25 साल पहले आईसीआसीआई बैंक में ही बतौर मैनेजमेंट ट्रेनी अपना करियर शुरू किया था।
दस सबसे बड़े भारतीय खरबपति
अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्स के मुताबिक इस साल के दस सबसे बड़े भारतीय खरबपतियों की सूची इस प्रकार है--
1- मुकेश अंबानी—27 अरब डॉलर
2- लक्ष्मी मित्तल—26.1 अरब डॉलर
3- अजीम प्रेमजी—17.6 अरब डॉलर
4- शशि-रवि रुइया—15 अरब डॉलर
5- सावित्री जिंदल—14.4 अरब डॉलर
6- अनिल अंबानी—13.3 अरब डॉलर
7- गौतम अदानी—10.7 अरब डॉलर
8- कुशल पाल सिंह—9.2 अरब डॉलर
9- सुनील भारती मित्तल—8.6 अरब डॉलर
10- कुमार मंगलम बिरला—8.5 अरब डॉलर
(एक अमेरिकी डालर लगभग 45 रुपये के बराबर होता है.)
बुधवार, 29 सितंबर 2010
ताजी रोटी, बासी रोटी
एक बार की बात है, एक बहुत ही धनाढ्य परिवार का मुखिया शरीर छोड़ चला गया. उसकी विधवा और उसके बच्चों ने कमाने के बजाय बाप-दादों की संचित पूँजी पर ही मौज -मजे करना शुरू कर दिया. नौकर-चाकर खाना बनाते और बहुएं पड़ी-पड़ी खाती रहतीं.
धनवान की विधवा जब कभी-कभी बच्चों और बहुओं से पूछती कि खाना कैसा बना है तो बहुएं बड़ाई करते हुए कहतीं--बहुत ही अच्छा बना है. सिर्फ छोटी बहू कहती कि माताजी खाना तो ठीक है लेकिन बासी है.
इसी तरह बहुओं कि सासु जब कभी जेवरात या कपड़े वगैरह लाती तो अन्य सारी बहुएं बड़ी प्रसन्न होकर तारीफें करतीं. सिर्फ छोटी बहू कहती कि चीजें तो ठीक हैं लेकिन पुरानी hain.
यह सिलसिला चलता रहा. एक दिन सासु ने परेशान होकर छोटी बहू से पूछा कि वह ऐसा क्यूँ कहती है.
बहू ने समझाते हुए कहा-- माताजी हमारी रसोई में जो कुछ भी बनता है वह हमारे पुरखों कि कमाई है. इसलिए मै उसे बासी कहती हूँ.
हमारे परिवार के पुरुषों का धर्म है कि वे भी हमारे पुरखों कि तरह खुद के बूते धन पैदा करें.
इसी तरह पुरखों के कमाए हुए धन से खरीदी गईं चीजें भी पुरानी माननी चाहिए. नई चीज तो वह है जो खुद कि कमाई से आयी हुई हो.
धनवान की विधवा जब कभी-कभी बच्चों और बहुओं से पूछती कि खाना कैसा बना है तो बहुएं बड़ाई करते हुए कहतीं--बहुत ही अच्छा बना है. सिर्फ छोटी बहू कहती कि माताजी खाना तो ठीक है लेकिन बासी है.
इसी तरह बहुओं कि सासु जब कभी जेवरात या कपड़े वगैरह लाती तो अन्य सारी बहुएं बड़ी प्रसन्न होकर तारीफें करतीं. सिर्फ छोटी बहू कहती कि चीजें तो ठीक हैं लेकिन पुरानी hain.
यह सिलसिला चलता रहा. एक दिन सासु ने परेशान होकर छोटी बहू से पूछा कि वह ऐसा क्यूँ कहती है.
बहू ने समझाते हुए कहा-- माताजी हमारी रसोई में जो कुछ भी बनता है वह हमारे पुरखों कि कमाई है. इसलिए मै उसे बासी कहती हूँ.
हमारे परिवार के पुरुषों का धर्म है कि वे भी हमारे पुरखों कि तरह खुद के बूते धन पैदा करें.
इसी तरह पुरखों के कमाए हुए धन से खरीदी गईं चीजें भी पुरानी माननी चाहिए. नई चीज तो वह है जो खुद कि कमाई से आयी हुई हो.
शनिवार, 11 सितंबर 2010
जोखिम का गणित
जोखिम लिए बिना किसी की भी जिंदगी में रंग का भरना मुश्किल है. फिर भी समझदार की पहचान यही है कि वह सिर्फ उसी जगह जोखिम ले जहाँ चूक जाने पर भी दुबारा प्रयास करने के अवसर मिल सकें.
कल्पना करें कि हम एक छोटी सी कार में चल रहे हैं. हमारे सामने एक ट्रक भी चल रहा है जिससे आगे निकलने के लिए हम ओवरटेकिंग का प्रयास करेंगे. अगर एक और भी बड़ा सा ट्रक सामने से आ रहा हो तो ओवरटेकिंग का प्रयास जोखिम लेने के बराबर होगा.
अब निकल गए तो ठीक; लेकिन नहीं निकल पाए तो?
क्या हमें दूसरा प्रयास करने का मौका मिलेगा?
शायद नहीं.
तो ऐसा जोखिम लेने लायक नहीं होता.
तो ऐसा जोखिम लेने लायक नहीं होता.
दूसरी तरफ एक बिजनेस है जो मात्र कोई एक हजार रुपये की लागत से शुरू हो जाता है.
अब विचार करें कि इस बिजनेस में सफल नहीं हो पाए तो?
क्या हमें दूसरा मौका नहीं मिलेगा?
जरूर मिलेगा!
इसीलिए मेरी दृष्टि में ऐसे प्रयास करने और जोखिम उठाने लायक हैं. नेटवर्क बिजनेस हमें ऐसे मौके आसानी से देता है.
अब विचार करें कि इस बिजनेस में सफल नहीं हो पाए तो?
क्या हमें दूसरा मौका नहीं मिलेगा?
जरूर मिलेगा!
इसीलिए मेरी दृष्टि में ऐसे प्रयास करने और जोखिम उठाने लायक हैं. नेटवर्क बिजनेस हमें ऐसे मौके आसानी से देता है.
यह एक प्रमुख कारण है कि मैं लोगों को अनिवार्य रूप से नेटवर्क बिजनेस बनाने की सलाह देता हूँ.
रविवार, 13 जून 2010
धन नहीं धन पैदा करने की विद्या दो
दुनिया में बहुत सारे लोग एक आम गलती करते हैं की वे अपने बच्चों को धन देकर निहाल करने की चेष्टा करते हैं. वे सोचते हैं की उनका संचित किया हुआ धन उनकी संतानों के लिए उपयोगी हो सकता हैं. दुर्भाग्य से माँ-बाप की यह सोच ठीक उल्टा फल देती है.
भारतीय दर्शन में एक बात सदियों से कही जाती रही है कि 'पूत सपूत तो क्या धन संचय और पूत कपूत यो क्या धन संचय'. यानी धन का संचय पूत के लिए करना कभी भी उपयोगी नहीं है.
संतान अगर सपूत है तो उसे धन मत दो. वह जितनी भी चाहिए पैदा कर लेगा. ठीक इसके विपरीत संतान अगर कपूत है तो उसे चाहे जितनी भी राशी जोड़ करके दे दो; वह उसे नष्ट कर देगा.
कुशल माँ-बाप वे हैं जो अपने बच्चों को धन पैदा करने कि विद्या सिखाते हैं. अभागे वे हैं वे अपनी गाढ़ी कमाई बच्चों के सुपुर्द करके खुद की शेष जिंदगी जोखिम में डाल देते हैं.
मिला हुआ धन पानेवालों में अनेकों विकार पैदा करता है. उसकी वास्तविक कीमत नहीं जानने के कारण बच्चे उसका दुरुपयोग करते है. इसके मुकाबले जब वे खुद धन पैदा करते हैं तो उनमें धन के साथ-साथ कई सद्गुण भी पैदा होते हैं. ये सद्गुण उनके काम तो आते ही हैं, माँ-बाप को भी तारने में मदद करते हैं.
भारतीय दर्शन में एक बात सदियों से कही जाती रही है कि 'पूत सपूत तो क्या धन संचय और पूत कपूत यो क्या धन संचय'. यानी धन का संचय पूत के लिए करना कभी भी उपयोगी नहीं है.
संतान अगर सपूत है तो उसे धन मत दो. वह जितनी भी चाहिए पैदा कर लेगा. ठीक इसके विपरीत संतान अगर कपूत है तो उसे चाहे जितनी भी राशी जोड़ करके दे दो; वह उसे नष्ट कर देगा.
कुशल माँ-बाप वे हैं जो अपने बच्चों को धन पैदा करने कि विद्या सिखाते हैं. अभागे वे हैं वे अपनी गाढ़ी कमाई बच्चों के सुपुर्द करके खुद की शेष जिंदगी जोखिम में डाल देते हैं.
मिला हुआ धन पानेवालों में अनेकों विकार पैदा करता है. उसकी वास्तविक कीमत नहीं जानने के कारण बच्चे उसका दुरुपयोग करते है. इसके मुकाबले जब वे खुद धन पैदा करते हैं तो उनमें धन के साथ-साथ कई सद्गुण भी पैदा होते हैं. ये सद्गुण उनके काम तो आते ही हैं, माँ-बाप को भी तारने में मदद करते हैं.
शनिवार, 12 जून 2010
अपने कुएं में पानी होगा
एक बार किसी आवासीय क्षेत्र में पानी का बड़ा भारी संकट आ गया. कहीं पीने के लिए भी पानी नहीं था. तभी पता पड़ा कि नजदीकी इलाके के एक धनवान के कुएं में पानी है. लोग समूह बना कर उस धनवान से पानी मांगने के लिए गए. उस उदार आदमी ने कहा कि मैं ना सिर्फ तुम्हें पानी दूंगा बल्कि रोजगार भी दूंगा. मुझे एक और कुआँ खुदवाने कि लग रही है. तुम रोजाना समय से आ जाओ, कुआँ खोदो, मजदूरी लो और चलते समय पीने का पानी भी ले जाओ.
लोग बड़े खुश हुए. पानी भी और रोजगार भी. वाह! क्या पैकेज है!
काम चलता रहा. इन्हीं लोगों में एक ऐसा व्यक्ति भी था जो रोजाना धनवान के लिए काम कर लेने के बाद घर जाकर अपने बाड़े में भी दो घंटे खुदाई करता था.
अगले साल देखा गया कि धनवान के तीन कुएं और भी हों गए हैं और वह चौथे पर काम करवा रहा है. पहले की तरह ही लोग अब भी काम पर आ रहें हैं और मजदूरी पा रहे हैं. उनके घरों में पानी का संकट अब भी बरकरार है. मजदूरी करने की मजबूरी अब भी उसी प्रकार से हावी है. लेकिन अकेला वह आदमी जिसने रोजाना अपने कुएं के लिए भी प्रयास किया था अब काम पर नहीं आता. उसके बाड़े में भी अब कुआं था जिसमे भरपूर पानी हों गया था. नौकरी करनेवाले "स्मार्ट" लोग अब उसके यहाँ नौकर बनने की जुगत लगा रहे थे; क्योंकि अब वह भी नए कुवेँ खुदवा रहा था.
जय "नौकरी" जय "रोजगार."
जो आपको इस कथा का मर्म समझा सके, उसकी शरण में चले जाइये. जिंदगी बन जाएगी. नहीं जाना हो तो पता करें की नया कुआँ कहाँ खुद रहा है. वहां नौकरी की जुगत लगाइए. आपकी तकदीर में इससे बेहतर कुछ और नहीं है.
लोग बड़े खुश हुए. पानी भी और रोजगार भी. वाह! क्या पैकेज है!
काम चलता रहा. इन्हीं लोगों में एक ऐसा व्यक्ति भी था जो रोजाना धनवान के लिए काम कर लेने के बाद घर जाकर अपने बाड़े में भी दो घंटे खुदाई करता था.
अगले साल देखा गया कि धनवान के तीन कुएं और भी हों गए हैं और वह चौथे पर काम करवा रहा है. पहले की तरह ही लोग अब भी काम पर आ रहें हैं और मजदूरी पा रहे हैं. उनके घरों में पानी का संकट अब भी बरकरार है. मजदूरी करने की मजबूरी अब भी उसी प्रकार से हावी है. लेकिन अकेला वह आदमी जिसने रोजाना अपने कुएं के लिए भी प्रयास किया था अब काम पर नहीं आता. उसके बाड़े में भी अब कुआं था जिसमे भरपूर पानी हों गया था. नौकरी करनेवाले "स्मार्ट" लोग अब उसके यहाँ नौकर बनने की जुगत लगा रहे थे; क्योंकि अब वह भी नए कुवेँ खुदवा रहा था.
जय "नौकरी" जय "रोजगार."
जो आपको इस कथा का मर्म समझा सके, उसकी शरण में चले जाइये. जिंदगी बन जाएगी. नहीं जाना हो तो पता करें की नया कुआँ कहाँ खुद रहा है. वहां नौकरी की जुगत लगाइए. आपकी तकदीर में इससे बेहतर कुछ और नहीं है.
शुक्रवार, 11 जून 2010
मुश्किल यह है कि लोग धंधे और बिजनेस के फर्क को नहीं समझ रहे
लगभग सारे ही लोग धंधे को भी बिजनेस कहने की आदत डाल चुके हैं. लेकिन इनमें बहुत फर्क है.
- धंधे में पैसा और समय, दोनों ही धंधा करनेवाले व्यक्ति का होता है. बिजनेस में ये दोनों ही महत्वपूर्ण तत्व अन्य लोग लगाते हैं.
- जिसका धन होता है, जोखिम भी तो उसी का होगा. इसलिए धंधे में असीमित जोखिम होता है. इसके मुकाबले बिजनेस में बहुत सारे लोगों का थोड़ा-थोड़ा धन लगा होता है, तो जोखिम भी बँटी हुई होती है.
- धंधे में करनेवाले को दिन-रात एक करके काम करना पड़ता है. बिजनेस में बहुत सारे लोग अपना समय एक-दूसरे के लिए लगाते हैं. अतः सभी को सीमित मात्रा में ही काम करने की जरूरत पड़ती है.
- डाक्टर, वकील और ऐसे ही अन्य पेशेवर भी धंधे के वर्ग में आते हैं.
- बिजनेस नेतृत्व यानि दिशा देने का काम है, जबकि धंधा रोजमर्रा की माथापच्ची का काम होता है.
- धंधे की कमाई की एक सीमा है. बिजनेस की कमाई सैद्धांतिक रूप से असीमित होती है.
बुधवार, 9 जून 2010
क्या आप हेलिकोप्टर से कूद जायेंगे?
एक सवाल आपसे. इसे अपने दोस्तों और मिलनेवालों से भी पूछ सकते हैं. जबाब करीब-करीब एक सा ही मिलेगा.
प्रश्न है--अगर मैं आपको एक हजार रूपये दूं तो क्या आप हेलिकोप्टर से कूद जायेंगे?
अगर आपका जबाब हाँ है तो गुरूजी के चित्र पर जाकर क्लिक क्लिक करें.
अगर आपका जबाब ना में हैं या आप संशय में हैं तो इस लेख के शीर्षक पर जाकर क्लिक करें.
हम सिर्फ यह साबित करना चाहते हैं कि हमें लोगों के मना करने से हताश या परेशान होने कि जरूरत नहीं है. लोग खुद ही बिना छानबीन किये तुरत और गलत फैसले करने की अपनी गन्दी आदत से परेशान हैं.
प्रश्न है--अगर मैं आपको एक हजार रूपये दूं तो क्या आप हेलिकोप्टर से कूद जायेंगे?
अगर आपका जबाब हाँ है तो गुरूजी के चित्र पर जाकर क्लिक क्लिक करें.
अगर आपका जबाब ना में हैं या आप संशय में हैं तो इस लेख के शीर्षक पर जाकर क्लिक करें.
हम सिर्फ यह साबित करना चाहते हैं कि हमें लोगों के मना करने से हताश या परेशान होने कि जरूरत नहीं है. लोग खुद ही बिना छानबीन किये तुरत और गलत फैसले करने की अपनी गन्दी आदत से परेशान हैं.
मंगलवार, 8 जून 2010
हमें किस प्रकार के नेटवर्क के लिए काम करना चाहिए?
दुनिया में जहाँ कहीं भी नेटवर्क बिजनेस होता है, वहीँ इसके अनेकों विकल्प उपलब्ध हैं. उनमें कौन सा सही है या नहीं इसके बारे में सरसरी तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता.
फिर भी हमें उन कम्पनियों के बारे में गंभीरता से विचारना चाहिए जो रोजमर्रा के इस्तेमाल के उत्पाद बनाती और बेचती हों. किसी भी नयी संस्था को सपोर्ट करने के बजाय हमें कम-से-कम एक साल इंतजार करके उनकी कार्यविधि और स्थिरता का विचार कर लेना चाहिए. पांच साल या उससे अधिक पुरानी कम्पनियाँ भरोसे के लायक हो सकती हैं.
इन बिन्दुओं पर विचार अवश्य करें---
फिर भी हमें उन कम्पनियों के बारे में गंभीरता से विचारना चाहिए जो रोजमर्रा के इस्तेमाल के उत्पाद बनाती और बेचती हों. किसी भी नयी संस्था को सपोर्ट करने के बजाय हमें कम-से-कम एक साल इंतजार करके उनकी कार्यविधि और स्थिरता का विचार कर लेना चाहिए. पांच साल या उससे अधिक पुरानी कम्पनियाँ भरोसे के लायक हो सकती हैं.
इन बिन्दुओं पर विचार अवश्य करें---
- प्रोमोटर -- किन लोगों ने कंपनी शुरू की है.
- पालिसी -- कंपनी खुद के धंधे पर जोर दे रही है या आपके आर्थिक विकास पर.
- प्रोडक्ट -- कंपनी के उत्पाद बार-बार जरूरत में आनेवाले होने चाहिए. (साबुन, तेल शेम्पू, पोषाहार ........इत्यादि).
- प्राइसिंग -- कंपनी के उत्पादों की कीमतें लोगों की आसान पहुँच की सीमा में होने चाहिए.
सोमवार, 7 जून 2010
लोग आपके बिजनेस में पैसा क्यों लगायेंगे?
महाशिव एस्टेट के संस्थापक और कई देशों में प्रापर्टी बिजनेस के सफल संचालक श्री चंदुलाल जी गेरोटा से एक MBA के विद्यार्थी ने पूछा कि इतने सारे लोग आपके बिजनेस में पैसा लगाते हैं; इसका राज क्या है? अगर मैं भी बिजनेस शुरू करूँ तो लोग मेरे बिजनेस में पैसे क्यों लगायेंगे?
श्री चंदुलाल जी का जबाब था: बिजनेस करनेवाले सफल लोग अपने निवेशकों की पूँजी की सुरक्षा करने की कला सीखते हैं. जो अपने निवेशकों के हितों की रक्षा करना जानता है, उसके बिजनेस में पैसा लगानेवालों की कोई कमी नहीं आती.
आप बैंकों को देख लें. मामूली से ब्याज देनेवाले बैंकों में लोग अपना बहुत सारा धन इसलिए रखते हैं कि उन्हें भरोसा है- बैंक उनकी पूँजी कि सुरक्षा करेंगे.
बुधवार, 19 मई 2010
याद रखें
- सारे लोग तो एक रूपये का अख़बार भी नहीं खरीदते. फिर सभी आपका प्लान कैसे अपना लेंगें? लोगों से मना करने की उम्मीद करें.
- सौ फ़ीसदी सफलता कहीं नहीं होती. असफलताएं ही सफलता की नींव हैं. धैर्य न खोने से ही सफलता मिलती है.
- सिर्फ पांच फ़ीसदी से भी कम लोग बिजनेस नेटवर्क बनाने की मानसिकता रखते हैं. बाकि तो नौकरी या धंधा ही करेंगे. इनमें आपके 'मित्र-मंडल' के लोग भी शामिल हैं.
- दुनिया में ऐसा कोई भी सफल व्यक्ति नहीं जिसने असफलताओं का मुकाबला नहीं किया हो.
सावधान: इन गलतियों से बचें!
- अपनी मौजूदा जीविका को तब तक नहीं छोड़ें जब तक आपके बिजनेस से होनेवाली कमाई आपके मौजूदा कमाई से दस गुना अधिक न हो जाये.
- किसी के मन को दुखानेवाली टिपण्णी न करें. यदि सामनेवाला ऐसी कोई टिपण्णी कर भी रहा हो तब भी अपना संयम बनाये रखें.
- याद रखें आप एक लीडर हैं जबकि सामनेवाला एक साधारण जीव. यदि वह विवेकशील होता तो हल्की टिपण्णी करता ही नहीं. अविवेक की होड़ न करें.
- आर्थिक लेन-देन में पारदर्शिता और भरोसा बनाये रखें.
- अपना चारित्रिक संबल कभी भी न खोएं. एक बार की गलती सारी जिंदगी सता सकती है.
- बहुत थोड़े से लोग मालिक बनने की मानसिकता और योग्यता रखते हैं. अतः बहुत सारे लोग आपके बिजनेस प्लान को नकार देंगे. इनसे हताश न हों. ये वे लोग हैं जो नौकर बन कर रहने को अभिशप्त हैं.
मंगलवार, 18 मई 2010
नेटवर्क बिजनेस श्रेष्ठ कैरिअर विकल्प क्यों हैं?
- अकेले इसी में न्यूनतम आर्थिक जोखिम में अधिकतम आर्थिक लाभ की सुविधा है.
- समय के साथ लगातार बढ़ती आमदनी की ठोस व्यवस्था सिर्फ इसी बिजनेस में है.
- इसमें दफ्तर, दुकान, कारखाना आदि लगाने की कोई मुश्किल जरूरतें नहीं होती.
- लगातार और निःशुल्क प्रशिक्षण की सुलभ व्यवस्था सिर्फ इसी बिजनेस में है.
- कमजोर या नौसिखिये लोगों को यहाँ पूरे सम्मान के साथ आगे बढ़ने में हर संभव मदद की जाती है. कैरियर ख़तम करने या हटाने जैसी कोई धमकी नहीं दी जाती.
- अकेले इसी में हर किसी को चाहे वह अमीर हो या गरीब बढ़ने के समान अवसर दिए जाते हैं.
रविवार, 16 मई 2010
हम दुखी हैं क्योंकि हमने सुखी होने का कोई उपाय किया ही नहीं!
यहाँ दिए गए प्रश्नों के जबाब आप खुद से मांगे. अगर आपके जबाब सकारात्मक यानी हाँ में है तो आप सही दिशा में जा रहें हैं. लक्ष्मी को देर-सबेर आपके कदम चूमने ही पड़ेंगे---
- क्या आपने ऐसा कुछ किया है जिससे आपके साथ-साथ किसी और को भी अधिक धन कमाने का अवसर मिले?
- क्या आपने बढ़ती महंगाई के कारण अपने खर्चों में कटौती के बजाय आमदनी में बढ़ोत्तरी करने का कोई उपाय किया है?
- क्या आपने अमीर लोगों में बैठना-उठना शुरू कर दिया है?
- क्या आप मानते हैं कि आपकी माली हालत के लिए आप और सिर्फ आप जिम्मेदार हैं? (तकदीर या कोई भी अन्य तत्व नहीं.)
- क्या आप मानते हैं कि उसी का भला होगा जो सही अर्थों में सबका भला चाहता है?
मंगलवार, 20 अप्रैल 2010
स्वर्णिम सूत्र
- भगवान श्री कृष्ण हमारे जीवन में क्रान्तिकारी परिवर्तन लाने में एकमात्र समर्थ गुरु हैं. भगवान श्री कृष्ण का नियमित रूप से ध्यान करें.
- श्रीमद भगवद्गीता (श्री गीताजी) भगवान कृष्ण की शब्दमयी मूर्ती है. इस ग्रन्थ को साक्षात् भगवान का रूप मान कर इसका आदर और सेवन करें.
- श्री गीताजी के श्लोकों में से क्रमिक रूप से एक श्लोक का रोजाना मनन करें.
- रोजाना चर्चा में आये सूत्रों और आदर्श वाक्यों के मर्म का बार-बार पुनर्विचार करें.
- कम से कम दस लोगों का समूह बनायें जिसमें हमारे सूत्रों और आदर्श वाक्यों कि चर्चा चलती रहे.
- रोजाना कम से कम एक व्यक्ति से आदर्श वाक्यों कि चर्चा जरूर करें.
- सप्ताह में कम से कम एक बार मंच से अपने और अन्य लोगों के समूहों को संबोधित करने का अभ्यास करें.
- खुद गुरूजी के संपर्क में रहें और अपने समूह के लोगों को खुद के संपर्क में रहने की प्रेरणा दें.
सोमवार, 19 अप्रैल 2010
आदर्श वाक्य
- हमारे साथ वही हुआ, वही हो रहा है और वही होगा जिसके हम पात्र हैं.
- अगर आप वही करेंगे जो करते आये हैं तो आपको वही मिलेगा जो मिलता आया है.
- जिसने अपने जीवन में जितना अधिक सहलाग (लीवरेज) पैदा कर लिया है, वह उतना ही सुखी है.
- अगर आप अधिक धनवान बनना चाहते हैं तो अधिक लोगों कि सेवा करें.
- गरीब पैदा होना लाचारी हो सकती है, लेकिन गरीबी में मर जाना महापाप है.
- ऐसी कोई ऊंचाई दुनिया में नहीं है जिसे आप छू नहीं सकते.
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