श्री गुरूजी

श्री गुरूजी
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मंगलवार, 20 अप्रैल 2010

स्वर्णिम सूत्र




  • भगवान श्री कृष्ण हमारे जीवन में क्रान्तिकारी परिवर्तन लाने में एकमात्र समर्थ गुरु हैं. भगवान श्री कृष्ण का नियमित रूप से ध्यान करें. 
  • श्रीमद भगवद्गीता (श्री गीताजी) भगवान कृष्ण की शब्दमयी मूर्ती है. इस ग्रन्थ को साक्षात् भगवान का रूप मान कर इसका आदर और सेवन करें. 
  • श्री गीताजी के श्लोकों में से क्रमिक रूप से एक श्लोक का रोजाना मनन करें.
  • रोजाना चर्चा में आये सूत्रों और आदर्श वाक्यों के मर्म का बार-बार पुनर्विचार करें. 
  • कम से कम दस लोगों का समूह बनायें जिसमें हमारे सूत्रों और आदर्श वाक्यों कि चर्चा चलती रहे.
  • रोजाना कम से कम एक व्यक्ति से आदर्श वाक्यों कि चर्चा जरूर करें. 
  • सप्ताह में कम से कम एक बार मंच से अपने और अन्य लोगों के समूहों को संबोधित करने का अभ्यास करें.
  • खुद गुरूजी के संपर्क में रहें और अपने समूह के लोगों को खुद के संपर्क में रहने की प्रेरणा दें. 

सोमवार, 19 अप्रैल 2010

आदर्श वाक्य

  • हमारे साथ वही हुआ, वही हो रहा है और वही होगा जिसके हम पात्र हैं. 
  • अगर आप वही करेंगे जो करते आये हैं तो आपको वही मिलेगा जो मिलता आया है. 
  • जिसने अपने जीवन में जितना अधिक सहलाग  (लीवरेज) पैदा कर लिया है, वह उतना ही सुखी है. 
  • अगर आप अधिक धनवान बनना चाहते हैं तो अधिक लोगों कि सेवा करें.
  • गरीब पैदा होना लाचारी हो सकती है, लेकिन गरीबी में मर जाना महापाप है.
  • ऐसी कोई ऊंचाई दुनिया में नहीं है जिसे आप छू नहीं सकते.