श्री गुरूजी

श्री गुरूजी
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बुधवार, 19 मई 2010

याद रखें

  • सारे लोग तो एक रूपये का अख़बार भी नहीं  खरीदते. फिर सभी आपका प्लान कैसे अपना लेंगें? लोगों से मना करने की उम्मीद करें.  

  • सौ फ़ीसदी सफलता कहीं नहीं होती. असफलताएं ही सफलता की नींव हैं. धैर्य न खोने से ही सफलता मिलती है.
  • सिर्फ पांच फ़ीसदी से भी कम लोग बिजनेस नेटवर्क बनाने की मानसिकता रखते हैं. बाकि तो नौकरी या धंधा ही करेंगे. इनमें आपके 'मित्र-मंडल' के लोग भी शामिल हैं.
  • दुनिया में ऐसा कोई भी सफल व्यक्ति नहीं जिसने असफलताओं का मुकाबला नहीं किया हो. 

सावधान: इन गलतियों से बचें!

  • अपनी  मौजूदा जीविका को तब तक नहीं छोड़ें जब तक आपके बिजनेस से होनेवाली कमाई आपके मौजूदा कमाई से दस गुना अधिक न हो जाये.
  • किसी के मन को दुखानेवाली टिपण्णी न करें. यदि सामनेवाला ऐसी कोई टिपण्णी कर भी रहा हो तब भी अपना संयम बनाये रखें. 
  • याद रखें आप एक लीडर हैं जबकि सामनेवाला एक साधारण जीव. यदि वह विवेकशील होता तो हल्की टिपण्णी करता ही नहीं. अविवेक की होड़ न करें.
  • आर्थिक लेन-देन में पारदर्शिता और भरोसा बनाये रखें.
  • अपना चारित्रिक संबल कभी भी न खोएं. एक बार की गलती सारी जिंदगी सता सकती है.
  • बहुत थोड़े से लोग मालिक बनने की मानसिकता और योग्यता रखते हैं. अतः बहुत सारे लोग आपके बिजनेस प्लान को नकार देंगे. इनसे हताश न हों. ये वे लोग हैं जो नौकर बन कर रहने को अभिशप्त हैं.   

मंगलवार, 18 मई 2010

नेटवर्क बिजनेस श्रेष्ठ कैरिअर विकल्प क्यों हैं?


  • अकेले इसी में न्यूनतम आर्थिक जोखिम में अधिकतम आर्थिक लाभ की सुविधा है.
  • समय के साथ लगातार बढ़ती आमदनी की ठोस व्यवस्था सिर्फ इसी बिजनेस में है.
  • इसमें दफ्तर, दुकान, कारखाना आदि लगाने की कोई मुश्किल जरूरतें नहीं होती.
  • लगातार और निःशुल्क प्रशिक्षण की सुलभ व्यवस्था सिर्फ इसी बिजनेस में है.
  • कमजोर या नौसिखिये लोगों को यहाँ पूरे सम्मान के साथ आगे बढ़ने में हर संभव मदद की जाती है. कैरियर ख़तम करने या हटाने जैसी कोई धमकी नहीं दी जाती.
  • अकेले इसी में हर किसी को चाहे वह अमीर हो या गरीब बढ़ने के समान अवसर दिए जाते हैं. 

रविवार, 16 मई 2010

हम दुखी हैं क्योंकि हमने सुखी होने का कोई उपाय किया ही नहीं!



यहाँ दिए गए प्रश्नों के जबाब आप खुद से मांगे. अगर आपके जबाब सकारात्मक यानी हाँ में है तो आप सही दिशा में जा रहें हैं. लक्ष्मी को देर-सबेर आपके कदम चूमने ही पड़ेंगे---
  • क्या आपने ऐसा कुछ किया है जिससे आपके साथ-साथ किसी और को भी अधिक धन कमाने का अवसर मिले? 
  • क्या आपने बढ़ती महंगाई के कारण अपने खर्चों में कटौती के बजाय  आमदनी में बढ़ोत्तरी करने का कोई उपाय किया है?
  • क्या  आपने अमीर लोगों में बैठना-उठना शुरू कर दिया है? 
  • क्या  आप मानते हैं कि आपकी माली हालत के लिए आप और सिर्फ आप जिम्मेदार हैं? (तकदीर या कोई भी अन्य तत्व नहीं.)
  • क्या आप मानते हैं कि उसी का भला होगा जो सही अर्थों में सबका भला चाहता है?