- हमारे साथ वही हुआ, वही हो रहा है और वही होगा जिसके हम पात्र हैं.
- अगर आप वही करेंगे जो करते आये हैं तो आपको वही मिलेगा जो मिलता आया है.
- जिसने अपने जीवन में जितने ही अधिक लोगों से परस्पर लाभ का समीकरण पैदा कर लिया है, वह उतना ही सुखी है.
- अगर आप अधिक धनवान बनना चाहते हैं तो अधिक लोगों की सेवा करें.
- गरीब पैदा होना लाचारी हो सकती है, लेकिन गरीबी में मर जाना महापाप है.
- दुनिया में ऐसी कोई ऊंचाई नहीं जिसे आप छू नहीं सकते. बस अपने लक्ष्य के मुताबिक प्रयास करने की जरूरत है.
गुरुवार, 30 सितंबर 2010
एक रसभरी जिंदगी हमारी भी
एक मित्र का पत्र आया है. कहते हैं-- तकदीर हमारा साथ क्यों नहीं देती? अब मैं एक बार फिर याद दिलाऊं कि तकदीर तो हमने ही लिखी है ना! फिर किसी और को दोष क्यों देते हो? याद रखो--
भारतीय महिला दुनिया के शिखर पर
भारत की दो महिलाओं ने दुनिया के कॉर्पोरेट जगत में भारत की शान बढ़ा दी है।
भारतीय मूल की पेप्सिको की प्रमुख इंदिरा नूयी को 'फॉर्च्यून' पत्रिका ने लगातार पांचवें साल दुनिया की सबसे ताकतवर महिला करार दिया है। इसी लिस्ट में क्राफ्ट फुड की इरेन रोसेनफील्ड को दूसरे स्थान पर रखा गया है।
सुश्री नूयी ने अपने कार्यकाल में पेप्सिको के लिए दो सबसे बड़ी बोटलिंग प्लांट्स का अधिग्रहण किया है. इस कारण कम्पनी का राजस्व 60 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। इसके साथ ही नूयी ने खर्च में प्रतिवर्ष 40 करोड़ डॉलर की कटौती के लक्ष्य को भी हासिल किया है।
उधर अमेरिका के बाहर दुनिया की 50 सबसे ताकतवर महिलाओं की लिस्ट मं आईसीआसीआई बैंक की प्रमुख चंदा कोचर को भी जगह मिली है।
इस लिस्ट में चंदा कोचर को 10वां स्थान मिला है। 49 वर्षीय चंदा कोचर ने करीब 25 साल पहले आईसीआसीआई बैंक में ही बतौर मैनेजमेंट ट्रेनी अपना करियर शुरू किया था।
दस सबसे बड़े भारतीय खरबपति
अमेरिकी पत्रिका फोर्ब्स के मुताबिक इस साल के दस सबसे बड़े भारतीय खरबपतियों की सूची इस प्रकार है--
1- मुकेश अंबानी—27 अरब डॉलर
2- लक्ष्मी मित्तल—26.1 अरब डॉलर
3- अजीम प्रेमजी—17.6 अरब डॉलर
4- शशि-रवि रुइया—15 अरब डॉलर
5- सावित्री जिंदल—14.4 अरब डॉलर
6- अनिल अंबानी—13.3 अरब डॉलर
7- गौतम अदानी—10.7 अरब डॉलर
8- कुशल पाल सिंह—9.2 अरब डॉलर
9- सुनील भारती मित्तल—8.6 अरब डॉलर
10- कुमार मंगलम बिरला—8.5 अरब डॉलर
(एक अमेरिकी डालर लगभग 45 रुपये के बराबर होता है.)
बुधवार, 29 सितंबर 2010
ताजी रोटी, बासी रोटी
एक बार की बात है, एक बहुत ही धनाढ्य परिवार का मुखिया शरीर छोड़ चला गया. उसकी विधवा और उसके बच्चों ने कमाने के बजाय बाप-दादों की संचित पूँजी पर ही मौज -मजे करना शुरू कर दिया. नौकर-चाकर खाना बनाते और बहुएं पड़ी-पड़ी खाती रहतीं.
धनवान की विधवा जब कभी-कभी बच्चों और बहुओं से पूछती कि खाना कैसा बना है तो बहुएं बड़ाई करते हुए कहतीं--बहुत ही अच्छा बना है. सिर्फ छोटी बहू कहती कि माताजी खाना तो ठीक है लेकिन बासी है.
इसी तरह बहुओं कि सासु जब कभी जेवरात या कपड़े वगैरह लाती तो अन्य सारी बहुएं बड़ी प्रसन्न होकर तारीफें करतीं. सिर्फ छोटी बहू कहती कि चीजें तो ठीक हैं लेकिन पुरानी hain.
यह सिलसिला चलता रहा. एक दिन सासु ने परेशान होकर छोटी बहू से पूछा कि वह ऐसा क्यूँ कहती है.
बहू ने समझाते हुए कहा-- माताजी हमारी रसोई में जो कुछ भी बनता है वह हमारे पुरखों कि कमाई है. इसलिए मै उसे बासी कहती हूँ.
हमारे परिवार के पुरुषों का धर्म है कि वे भी हमारे पुरखों कि तरह खुद के बूते धन पैदा करें.
इसी तरह पुरखों के कमाए हुए धन से खरीदी गईं चीजें भी पुरानी माननी चाहिए. नई चीज तो वह है जो खुद कि कमाई से आयी हुई हो.
धनवान की विधवा जब कभी-कभी बच्चों और बहुओं से पूछती कि खाना कैसा बना है तो बहुएं बड़ाई करते हुए कहतीं--बहुत ही अच्छा बना है. सिर्फ छोटी बहू कहती कि माताजी खाना तो ठीक है लेकिन बासी है.
इसी तरह बहुओं कि सासु जब कभी जेवरात या कपड़े वगैरह लाती तो अन्य सारी बहुएं बड़ी प्रसन्न होकर तारीफें करतीं. सिर्फ छोटी बहू कहती कि चीजें तो ठीक हैं लेकिन पुरानी hain.
यह सिलसिला चलता रहा. एक दिन सासु ने परेशान होकर छोटी बहू से पूछा कि वह ऐसा क्यूँ कहती है.
बहू ने समझाते हुए कहा-- माताजी हमारी रसोई में जो कुछ भी बनता है वह हमारे पुरखों कि कमाई है. इसलिए मै उसे बासी कहती हूँ.
हमारे परिवार के पुरुषों का धर्म है कि वे भी हमारे पुरखों कि तरह खुद के बूते धन पैदा करें.
इसी तरह पुरखों के कमाए हुए धन से खरीदी गईं चीजें भी पुरानी माननी चाहिए. नई चीज तो वह है जो खुद कि कमाई से आयी हुई हो.
शनिवार, 11 सितंबर 2010
जोखिम का गणित
जोखिम लिए बिना किसी की भी जिंदगी में रंग का भरना मुश्किल है. फिर भी समझदार की पहचान यही है कि वह सिर्फ उसी जगह जोखिम ले जहाँ चूक जाने पर भी दुबारा प्रयास करने के अवसर मिल सकें.
कल्पना करें कि हम एक छोटी सी कार में चल रहे हैं. हमारे सामने एक ट्रक भी चल रहा है जिससे आगे निकलने के लिए हम ओवरटेकिंग का प्रयास करेंगे. अगर एक और भी बड़ा सा ट्रक सामने से आ रहा हो तो ओवरटेकिंग का प्रयास जोखिम लेने के बराबर होगा.
अब निकल गए तो ठीक; लेकिन नहीं निकल पाए तो?
क्या हमें दूसरा प्रयास करने का मौका मिलेगा?
शायद नहीं.
तो ऐसा जोखिम लेने लायक नहीं होता.
तो ऐसा जोखिम लेने लायक नहीं होता.
दूसरी तरफ एक बिजनेस है जो मात्र कोई एक हजार रुपये की लागत से शुरू हो जाता है.
अब विचार करें कि इस बिजनेस में सफल नहीं हो पाए तो?
क्या हमें दूसरा मौका नहीं मिलेगा?
जरूर मिलेगा!
इसीलिए मेरी दृष्टि में ऐसे प्रयास करने और जोखिम उठाने लायक हैं. नेटवर्क बिजनेस हमें ऐसे मौके आसानी से देता है.
अब विचार करें कि इस बिजनेस में सफल नहीं हो पाए तो?
क्या हमें दूसरा मौका नहीं मिलेगा?
जरूर मिलेगा!
इसीलिए मेरी दृष्टि में ऐसे प्रयास करने और जोखिम उठाने लायक हैं. नेटवर्क बिजनेस हमें ऐसे मौके आसानी से देता है.
यह एक प्रमुख कारण है कि मैं लोगों को अनिवार्य रूप से नेटवर्क बिजनेस बनाने की सलाह देता हूँ.
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