श्री गुरूजी

श्री गुरूजी
apneguruji@gmail.com

शनिवार, 11 सितंबर 2010

जोखिम का गणित

जोखिम लिए बिना किसी की भी जिंदगी में रंग का भरना मुश्किल है. फिर भी समझदार की पहचान यही है कि वह सिर्फ उसी जगह जोखिम ले जहाँ चूक जाने पर भी दुबारा प्रयास करने के अवसर मिल सकें. 
कल्पना करें कि हम एक छोटी सी कार में चल रहे हैं. हमारे सामने एक ट्रक भी चल रहा है जिससे आगे निकलने के लिए हम ओवरटेकिंग का प्रयास करेंगे. अगर एक और भी बड़ा सा ट्रक सामने से आ रहा हो तो ओवरटेकिंग का प्रयास जोखिम लेने के बराबर होगा. 
अब निकल गए तो ठीक; लेकिन नहीं निकल पाए तो?
क्या हमें दूसरा प्रयास करने का मौका मिलेगा? 
शायद नहीं. 
तो ऐसा जोखिम लेने लायक नहीं होता. 
दूसरी तरफ एक बिजनेस है जो मात्र कोई एक हजार रुपये की लागत से शुरू हो जाता है. 
अब विचार करें कि इस बिजनेस में सफल नहीं हो पाए तो?
क्या हमें दूसरा मौका नहीं मिलेगा?
जरूर मिलेगा! 
इसीलिए मेरी दृष्टि में ऐसे प्रयास करने और जोखिम  उठाने लायक हैं. नेटवर्क बिजनेस हमें ऐसे मौके आसानी से देता है.
यह एक प्रमुख कारण है कि मैं लोगों को अनिवार्य रूप से नेटवर्क बिजनेस बनाने की सलाह देता हूँ. 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें